Monday, 3 December 2018

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अनोखा शहर जहाँ सर्दियों में 40 दिन सूरज नहीं निकलता, गर्मियों में दो महीने रात नहीं होती
हम सबने कई सारी रोचक चीजो के बारे में सुना और जाना होगा| लगभग लोग ये भी जानते होगे की दुनिया का एक हिस्सा ऐसा भी है जहाँ महीने के दिन और इतने ही समय की रात होती है लेकिन वहां कोई आबादी नहीं है| अब हम आपको ऐसे शहर के बारे में बता रहे है जहाँ सर्दियों के मौसम में चालीस दिन सूरज नहीं निकलता है और गर्मियों के मौसम में साठ दिन रात नहीं होती है लेकिन फिर भी इस शहर के लोग आराम से रह रहे है| इस शहर का नाम murmansk जो की रूस में है|


आराम से रहते है लोग- प्रथम विश्वयुद्ध के बाद इस शहर को रूस के प्रमुख बन्दरगाहो में गिना जाता था| यहाँ की जनसँख्या लगभग तीन लाख है और यहाँ पर सभी सुविधाएँ जैसे की ट्रंसपोर्ट, एयरपोर्ट, स्कूल और कंपनीज है| यहाँ के लोग हमेशा की तरह काम करते है| सर्दियों के मौसम में यहाँ का तापमान लगभग -34 डिग्री तक चला जाता है| इस समय यहाँ पर चालीस दिन सूरज नहीं निकलता है| हजारो की संख्या में बाहर से लोग इस जगह घूमने आते है| हालाँकि वो ज्यादा दिन नहीं रुक पाते क्योकि उन्हें यहाँ का जीवन शूट नहीं करता है| जबकि इसके उलट यहाँ के लोग ऑफिस जाते है और बच्चे स्कूल जाते है| ये लोग मौसम से प्रभावित नहीं होते है क्योकि इनकी आदत में ये बात शुमार हो चुकी है|



पोलर डे और पोलर रातें- यहाँ जब रात और दिन नहीं होते है उन्हें अलग अलग शब्दों से जाना जाता है| 2 दिसम्बर से 11 जनवरी तक यहाँ सूरज नहीं निकलता है और इसे पोलर नाईट कहा जाता है| यह समय साठ दिन का होता है और इस समय यहाँ खूब सर्दी भी पड़ रही होती है| इसके अलावा 22 मई से 23 जुलाई तक यहाँ रात नहीं होती है और इसे पोलर डे कहा जाता है| पोलर डे के समय यहाँ के लोगो को शायद ये भूल जाता होगा की रात कब हुई थी| ऐसे ही पोलर नाईट में भी होता है| लेकिन जब सूरज निकलता है तो शुरुआत में उसका समय लगभग 34 मिनट का होता है| इस दौरान यहाँ के लोग सडको में जाते है और जश्न मनाना शुरू कर देते है| सूर्य के आने की ख़ुशी में इस दौरान पूरा शहर झूम रहा होता है| इसे एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है| आमतौर पर बाकी देशो और शहरो से जाने वाले लोगो को डॉक्टर्स वहां अधिक दिन रुकने से मना करते है| उनका कहना होता है की अधिक समय तक सूर्य नहीं निकलने की वजह से वहां जाने वाले लोगो को विटामिन डी की कमी हो सकती है जिससे हड्डियों में दर्द या विकास रुकने जैसी समस्या हो सकती है| लेकिन एक बात देखी गई की यहाँ के स्थानीय लोगो को आजतक ऐसी कोई भी समस्या नहीं हुई और वो पूरी तरह से स्वस्थ है| जब सर्दियों के मौसम में तापमान बहुत कम हो जाता है तब यहाँ के लोग बिजली बचाते है और उस समय बची हुई बिजली ये गर्मियों के मौसम में उस दिन इस्तेमाल करते है जब रात नहीं होती है|

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कहते है की आप जितना ज्यादा रिजेक्ट होते है तो उतना ही ज्यादा आपके सफल होने की सम्भावनाये बढ़ जाती है क्योकि रिजेक्शन आपको पहले से बेटर बनाता है| जब इंसान किसी रिजेक्शन को दिल में ना लेकर ये सोचता है की उसके पास इससे बड़ा मौका आएगा तब वह जैक मा बन जाता है| ये कहानी बताती है की कैसे तीस बार नौकरी से रिजेक्ट होने के बाद जैक मा बन गए एशिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक|

शरुआत कोई खास नहीं- जैक मा गरीब परिवार का एक लड़का जिसे अंग्रेजी बोलने का बहुत शौक था लेकिन चाइना में ये भाषा सिखाई नहीं जाती थी| तो उसने पकड़ा उसके गाँव के आसपास घूमने आने वाले विदेशी नागरिको को और शर्त हुई वो इन नागरिको को फ्री में गाइड करेगा और बदले में उसे अंग्रेजी सिखाई जाएगी| डील पक्की हुई और यही से जैक ने अंग्रेजी सीखी| जैक के इन्ही पर्यटक दोस्त में से एक ने इन्हें जैक नाम दिया क्योकि इससे पहले ये मा यून हुआ करते थे| इसके बाद अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया| इसके बाद उन्होंने ट्रांसलेटर सेंटर खोला जिसमे अंग्रेजी से चाइनीज और चाईनीज से अंग्रेजी भाषा में ट्रांसलेट किया जाता था|



येलो पेजेस से अलीबाबा- जब साल 1996 में उन्होंने येलो पेजेस खोला तो सबके पास इन्टरनेट नहीं था| इसके तीन साल बाद अपने 17 दोस्तों के साथ मिलकर साठ हजार डालर का जुगाड़ किया और खोल दिया अलीबाबा| कहते है की अलीबाबा का नाम उन्हें ऐसे सूझा की वो गली गली जाकर लोगो से पूछते थी की क्या आप अलीबाबा को जानते थे तो सबने कहा हाँ| उन्हें लगा इसे सब जानते है और मिल गया कंपनी का नाम|



अलीबाबा- ‘अली बाबाचीन और बाकी देशों के निर्यातकों को दुनियाभर की कंपनियों से जोड़ती है| अलीबाबा टाओबाओ डॉट कॉम भी चलाती है| ये चीन की सबसे बड़ी शॉपिंग वेबसाइट है| अली बाबा ने आने वाले सालों में अपनी पहुंच पेमेंट वेबसाइट तक भी बनाई है| उन्होंने जब अली पे नाम से वेबसाइट शुरू की तो लोगो ने कहा की ये नहीं चलेगा लेकिन आज के समय पर अली पे के लगभग अस्सी करोड़ यूजर है|



कैसे काम करता है- अलीबाबा लिस्टिंग के कोई पैसे नहीं लेती है| वो कंपनी को सीधे आम इंसानों से जोडती है| आप जाइए अपनी कंपनी को अलीबाबा में रजिस्टर कीजिए और अपना सामान बेचने लग जाइए| बस अलीबाबा आपको अपनी जगह देता है और उस जगह लगने वाले विज्ञापनों से पैसा कमाता है| पूरा सिस्टम ऑनलाइन है इसीलिए किसी को कोई सेट-अप करने की जरूरत नहीं होती है| आप वेलेंटाइन पर सबसे अधिक शौपिंग करते होगे लेकिन अलीबाबा ने सिंगल्स डे 11 नवम्बर को शौपिंग डे बनाया और ये कंपनी हर साल अपना ही रिकॉर्ड तोडती है| आज जैक मा कुल संपत्ति भारत के रक्षा वजट से दो हजार करोड़ उर्पय एज्यादा है यानी की 2 लाख 62 हजार करोड़ रुपये|



ये बाते भी जान लो- जैक ने एक इंटरव्यू में कहा की जब केएफसी चाइना आया था तो चौबीस लोगो में वो अकेले रिजेक्ट हुए और बाकी 23 लोग रख लिए गए| इसके अलावा हॉवर्ड में लगभग दस बार अप्लाई किया लेकिन रिजेक्ट हो गया| कंपनी में 47 फीसदी महिलाये है| हर साल सालाना फंक्शन में जैक पॉप सिंगर का रूप ले जाकर जाते है और अपने कर्मचारियों का मनोरंजन करते है| उनका कहना है की टीम खुश रहेगी तो मैं तरक्की करूंगा| जैक कहते है की अगर आप दस हजार करोड़ डालर है तो इसका मतलब की ये वो भरोसा है जो समाज ने आपके ऊपर किया है|



जैक मा आजकल मार्शल आर्ट सीख रहे है| इसके साथ साथ अब वो अलग अलग देशो के राष्ट्राध्यक्षो से मिल रहे है और बहुत ही जल्द अलीबाबा आपको अपने देश में देखने को मिलेगा|

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अंगुली चटकाने का शौक देता इस बिमारी को दावत!

अक्सर आप में से बहुत से लोग उंगलियों के जोडों के साथ ही साथ घुटनों, टखनों, कमर, गर्दन आदि को चटकाते रहते हैं। इनमें से आने वाली आवाजों के पीछे कई अलग-अलग कारण होते हैं। बचपन से आप ये सुनते रहे होगें कि अंगुलिया चटकाने से हड्डियों को आराम मिलता है, आप बहुत हल्का महसूस करते हैं। लेकिन आपको बता दें अंगुलिया चटकाने से हड्डियों पर फर्क पड़ता है, इससे आप हल्का महसूस नहीं करेगें बल्कि इससे आपको गठिया की समस्या भी हो सकती है। लेकिन थकान और आदत से मजबूर होने के कारण हम अपनी इस गलत आदत को अभी तक सुधार नहीं पाएं। अगर आपको भी अंगुलिया चटकाने की बुरी आदत हो तो अभी भी संभल जाएं। आइए जानते हैं अंगुलिया चटकने पर जो आवाज आती है उसके पीछे का कारण क्या हैं।

कुछ लोगो में अंगुलियां चटकाने की आदत ही होती है। उसके अलावा ज्यादातर लोग थकान मिटाने के लिए उंगलिया चटकाते हैं। ज्यादा देर तक कम्प्यूटर पर बैठे रहने से अंगुलियों में थकान हो जाती है। लगातार काम के चलते शरीर के अन्य अंग भी थक जाते हैं, उनकी थकान को तुंरत राहत देने के लिए चटकाना आसान लगता है।

आवाज का कारण

अंगुलियों को चटकाते समय आने वाली आवाज, हमारे जोड़ों मे पाए जाने वाले लुब्रीकेंट पदार्थ सानोवियल फ्लड होता है। जिससे निकलने वाली गैस की बबल होती है। वहीं जल्दी से उठते समय घुटनो से आने वाले तड़कने की आवाज नसों की मांसपेशियों और हड्डियों के ओर चलने की आवाज होती है। जैसे ही नसें अपनी जगहों पर वापस पंहुचती है उनके स्थित होने की आवाज आती है। गठिया से पीडित जोडों मे अक्सर तरलता की कमी और सतहों का खुरदुरा हो जाने के कारण आवाज आती है।

अंगुलियां चटकाना है नुकसानदायक

कुछ लोगों को लगता है कि अंगुलिया चटकाने से गठिया की समस्या हो जाती है। लेकिन ये बात सच है ज्यादा अंगुलिया चटकाने से गठिया की समस्या होने के ज्यादा चांसेस होते है। अगर चटकाने से आपको किसी तरह के दर्द का अनुभव हो रहा हो तो डॉक्टर की सलाह लें। कुछ शोधों का मानना है कि अंगुलिया चटकाने से किसी तरह का नुकसान नहीं होता है।

हालांकि कुछ शोधों में ऐसा भी देखा गया है कि जरूरत से ज्यादा चटकाने से हाथों की पकड़ भी खराब हो सकती है। साथ ही सूजन की समस्या भी हो सकती है। कभी कभी अंगुलिया चटकाने से ख़ुद को चोट पहुंचाने की ख़बरें सुनाने को मिलती हैं, जिसमें अंगूठे या उंगली में चोट शामिल होती। अंगुलिया चटकाना एक आदत बन जाती है जो कि अच्छी नही है।

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