Monday, 22 October 2018

Today latest news in hindi - Thelatesthindinews.com (डिप्रेशन-है-तो-इन-बातों-पे)

डिप्रेशन है तो इन बातों पे जरुर दें ध्यान

वैश्विक स्तर पर मध्यम आय वाले देशों में बीमारी का सबसे मुख्य कारण डिप्रेशन हैं। वैश्विक स्तर पर डिप्रेशन को गैर घातक स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियों में डिप्रेशन सबसे बड़ा योगदानकर्ता माना गया हैं। विश्‍व स्वास्थ्‍य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक दशक में डिप्रेशन के मामलों में 18% की बढ़ोतरी हुई है जिसमें 25% भारतीय किशोर होते हैं. भारत में 13 से 15 साल की उम्र का हर 4 में से 1 बच्चा अवसाद यानी डिप्रेशन का शिकार है. भारत की जनसंख्या 131.11 करोड़ है जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के किशोरों की संख्या 7.5 करोड़ है. यह कुल जनसंख्या का 5.8% है. पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं.
भारत में कॉर्पोरेट कर्मचारियों के एक सर्वे में यह पाया गया कि लगभग 42. 5 % कॉर्पोरेट कर्मचारी डिप्रेशन का शिकार हैं।
गुस्सा करना इंसान की फितरत है और इस गुस्से के कारन अकेलापन, चिड़चिड़ापन, उदासी, कुण्ठा, तनाव, आत्महत्या की इच्छा होना, अवसाद इत्यादि होना आम बात हैं। गुस्से के कारण व्यक्ति आपराधिक प्रवर्ति का हो जाता हैं और उसे कई बीमारियां भी घेर लेती हैं। क्रोध डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण होता हैं। डिप्रेशन यानी अवसाद मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसका असर स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और व्यक्ति के मन में अजीब से विचार आते हैं। अवसाद के कारण व्यक्ति अपना खुद का नुकसान भी कर बैठता है।
अवसाद वाले लोगों में आमतौर पर निम्नलिखित में से कई लक्षण होते हैं: ऊर्जा का नुकसान; भूख में बदलाव; अधिक या कम सोना; चिंता, कम एकाग्रता; अनिश्चितता; बेचैनी; बेकारता, अपराध, या निराशा की भावनाएं और आत्म-हानि या आत्महत्या के विचार।
आइए डिप्रेशन के कारण होने वाले व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नज़र डालते हैं और जानते है किन बातों का ध्यान रखकर आप डिप्रेशन से बच सकते हैं –
डिप्रेशन के कुछ लक्षण:-
नींद न आना या कम आना
भूख कम लगना
दिमाग परेशान रेहान
हर समय उदास रहना
आत्मविश्वास में कमी
अत्यधिक थकान और सुस्ती
हर वक़्त उत्तेजना रहना
बुरी आदतों जैसे स्मोकिंग, ड्रिंकिंग आदि मादक पदार्थों का सेवन करना
आत्महत्या करने का ख़्याल
किसी काम में मन ना लगना
डिप्रेशन से बचने के उपाय  –
अपने आपको परिवार में सम्मिलित करें – डिप्रेशन वाले लोगों को इससे उबरने के लिए नियमित तौर पर परिवार के साथ समय व्यतीत करना चाहिए। ऐसे में उन लोगो से जिन पर आप भरोसा करते हों या जो आपके विश्वास पात्र हो उन्हें अपनी समस्या बताएं और उनसे मदद मांगें।
अच्छी आदतें, रोज़ाना व्यायाम और संतुलित आहार शैली – अच्छी आदतों को अपनाएं जैसे समय पर सपना और समय पर उठना। रोज़ाना व्यायाम करना जिससे शरीर ऊर्जावान रहें। संतुलित आहार शैली अपनाना। स्वस्थ मन तो स्वस्थ शरीर। कई वैज्ञानिक शोध प्रमाणित करते हैं कि व्यायाम डिप्रेशन को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है।
नकारात्मक विचारों से बचें और अच्छे दोस्तों से मिलें – नकारात्मक विचार व्यक्ति के दिमाग में असंतुलन पैदा करते हैं, इनसे बचें। अच्छे दोस्तों के साथ समय बिताएं और उनके साथ कही छुटिटयां मानाने जाएं।

business news in hindi - thelatesthindinews.com (आइये-जाने-गर्भावस्था-में)

आइये जाने गर्भावस्था में क्यों होती है महिलाओं की आँखें कमजोर

माँ बनना एक बहुत ही सुन्दर अहसास है जो हर महिला को खुश कर देता है | लेकिन माँ बनना कोई आसान बात नहीं है माँ बनने के लिए कई साड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है उन्हें गर्भावस्था में महिलाओं को कई सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है गर्भावस्था में महिलाओं में बहुत तरह के परिवर्तन होते है इस अवस्था में मोर्निंग सिकनेस , पीठ दर्द , और कमरदर्द की समस्या आम है मगर इसके अलावा कुछ महिलाओं में ब्लरी विज़न यानि धुधला दिखने की समस्या हो जाती है आइये जाने ऐसा क्यों होता है और इससे बचने के कुछ उपाय –
गर्भावस्था में महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते है| इस कारण शरीर के कई सारे अंगो पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसी का प्रभाव आँखों पर भी पड़ता है इसलिए आँखे कमजोर हो जाती है ये एक नार्मल समस्या है\ जो टाइम के अनुसार ठीक हो जाती है शरीर में खून का संचार और तरल पदार्थ का निर्माण ज्यादा होने के कारण भी आंखे धुंधली हो जाती है |
गर्भावस्था में इन तरल पदाथों के कारण आँखों के लेंस और कोर्निया मोटे हो जाते है जिसके कारण ऑयबाल पर प्रभाव पड़ता और आँखे कमजोर हो जाती है कभी कभी तो सुख भी जाती है |
अगर आपकी आँखे कमजोर हो जाए तो आपसे गुजारिश है की कांटेक्ट लेंस का प्रयोग ना करे चश्मे का प्रयोग करे किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाए ताकि आपकी आँखों का अच्छा इलाज हो सके |
कई बार ये समस्या डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है पर अगर आपको देखने में कुछ ज्यादा ही प्रॉब्लम हो रही है तो आप डॉक्टर को दिखा सकते है और साथ ही अगर डिलीवरी के बाद भी आपकी आँखे ठीक ना हो तो कुछ दिनों तक इन्तेजार कर सकती है ठीक होने का अगर फिर भी न हो तो आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकती है|
गर्भावस्था में महिलाओं को नियमित व्यायाम और पोषणयुक्त आहार का सेवन करे जिससे आँखों की समस्या को कई हद तक दूर किया जा सकता है ऐसी महिलाओं को सबसे ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए| हालंकि आपकी जानकारी के लिए बता दे की आँखों की समस्या मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण भी हो सकती है इसलिए अपने डॉक्टर को दिखाए और फिर कोई भी घर का उपचार ले |
वैसे तो ये आँखों की समस्या प्रसव के बाद ठीक हो जाती है लेकिन कुछ केसेस में ऐसा नही हो पाता है और आपकी आँखे ठीक नहीं हो पाती है आप अपने प्रसव के बाद 6 से 7 महीने तक इन्तेजार कर सकती है अगर फिर भी आपकी आँखे पहले जैसी नहीं हो पाती है तो फिर आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए और आप आँखों की सर्जरी करा सकती है एक सिंपल और सामन्य सर्जरी से आपकी आँखों की साड़ी परेशानिया ठीक हो जाती है |
हमे आशा है की आपको ये आर्टिकल जरुर पसंद आएगा हम आपके लिए ऐसे आर्टिकल लाते रहेंगे |

national news in hindi - thelatesthindinews.com -(हार्ट-अटैक-आने-पर-एक-चुटकी)

हार्ट अटैक आने पर एक चुटकी लाल मिर्च बचा सकती है आपकी जान, जानिये कैसे

हमारी बदलती लाइफस्टाइल और बदल रहे खान पान के तरीके ने हमारे स्वास्थ को कई सारी ऐसी बीमारियाँ दी है जो जानलेवा होती जा रही है| ऐसी ही एक बीमारी है हार्ट अटैक जो की आज के समय में अधिक से अधिक लोगो को हो रही है| वैसे तो हार्ट अटैक रोकने के लिए महगी महगी दवाइयां दी जाती है लेकिन एक ऐसी चीज है जिससे आप हार्ट अटैक आने पर उसे चुटकियों में खत्म कर सकते है| वो चीज आपके किचेन में मौजूद है और नाम है लाल मिर्च-

ऐसे करे इस्तेमाल-
जब आपके सामने किसी शख्स को हार्ट अटैक आता है तो आपका दिमाग काम करना बंद कर देता है की आपको क्या करना चहिये लेकिन ऐसे में आप थोड़ी सी समझदारी दिखाकर उस शख्स की जान बचा सकते है| आप एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर लीजिए और उसे एक ग्लास पानी में मिलाये और घोल बनाकर उस शख्स को पिला दे जिसे हार्ट अटैक आया है| आप देखेगे की एक मिनट के अंदर ही उसकी हालत में सुधार हो रहा है और वो शक्स सामान्य हो रहा है| हालाँकि इस घोल को देने की एक शर्त है की मरीज होश में होना चहिये, अगर मरीज होश में नहीं है तो उसे इस घोल का फायदा नहीं होगा| वैसे हार्ट अटैक आने पर कोई तत्काल बेहोश नहीं होता है| लाल मिर्च आपके घर में मौजूद होती है और आप इसके सही इस्तेमाल कर सकते है| अगर आपके घर में कोई ऐसा शक्स है जिसे पहले भी हार्ट अटैक आ चुका है या फिर आगे आने की सम्भावना है तो आप उसके पास ही लाल मिर्च का डिब्बा रखे और ऐसी स्थिति होने पर इस्तेमाल करे|

क्यों फायदेमंद है लाल मिर्च– यह चीज इतनी फायदेमंद क्यों होते है इसके पीछे कई सालो तक शोध चल और इसके बाद पता चला की आखिर हार्ट अटैक को रोकने में लाल मिर्च क्यों फायदेमंद है| दरअसल लाल मिर्च में “स्कोवाइल” पाए जाते है और यह बहुत अधिक मात्रा में होते है लगभग एक यूनिट में 90 हजार स्कोवाइल| यह एक शक्तिशाली उत्तेजक होता है जो की ह्रदय की गति को बढ़ा देता है और इसके अलावा यह हमारे शरीर में रक्त संचार को भी ठीक कर देती देता है| इसी वजह से लाल मिर्च हार्ट अटैक में इतनी अधिक फायदेमंद है|

आप मिश्रण भी बना सकते है– हार्ट अटैक से बचने के लिए आप लाल मिर्च का एक घोल बना सकते है जिसे आप स्टोर करके रखे और हार्ट अटैक होने पर इसका इस्तेमाल करे| इसके लिए आपको तीन चीजे चहिये लाल मिर्च पाउडर, लाल मिर्च और वोडका और साथ में थोड़ी कोई भी अल्कोहल| सबसे पहले एक कांच का जार लीजिए और इसके एक चौथाई हिस्से में लाल मिर्च का पाउडर डाल दीजिए और इसमें इतनी वोडका मिलाएं की यह मिर्च डूब जाए| इसके बाद दो से बड़ी लाल मिर्ची ले और इसे मिक्सर में लेकर इसमें थोड़ी से अल्कोहल मिलाये और इसे मिक्स कर ले| अब बना हुआ मिश्रण उस कांच के जार में डाल दे और इसे हिलाएं| इसके बाद आप इसे दो हफ्तों के लिए अँधेरी जगह में रख दे और फिर इसका इस्तेमाल करे जब हार्ट अटैक आये| अगर आप बेहतर घोल चाहते है तो तीन महीनो के लिए इसे रख दे|

Latest news in hindi - thelatesthindinews.com (आत्महत्या-से-लेकर-हजार-कर)

आत्महत्या से लेकर हजार करोड़ की कंपनी बनाने तक का सफ़र

हमारे आसपास घूमती कई सारी कहानिया हमे बहुत कुछ सिखाती है और कई सारी कहानियां होती है जिनमे भरोसा करना मुश्किल होता है लेकिन वो सच होती है| ऐसी ही कहानी है एक औरत की जिसने आत्महत्या करने का विचार किया लेकिन बाद में हजार करोड़ की कंपनी बना ली| नाम है कल्पना सरोज और आज ये कमानी ट्यूब की मालकिन है|

शुरुआती जीवन– साल 1961 महाराष्ट्रा का अकोला जिला और उसमे गाँव रोपरखेड़ा जहाँ कल्पना का जन्म एक दलित परिवार में हुआ| पिता पुलिस में हवालदार थे और मात्र तीन सौ रुपये मिला करते थे| दो भाई और तीन बहनों के साथ वो सरकारी कमरे में रहती थी| इसके अलावा दादा-दादी और चाचा का खर्चा अलग था| कल्पना जब 12 साल की हुई तो उनका विवाह उनसे दस साल बड़े आदमी से कर दिया गया जिससे उन्हें बहुत दुःख हुआ| ससुराल में उन्हें बहुत मारा जाता था, कभी नमक कम हो जाने से तो कभी कपडे सही साफ़ ना करने पर| कल्पना इतनी प्रताड़ित हुई की आत्महत्या करने का विचार मन में आ गया और जहर खा लिया लेकिन कुछ लोगो ने उन्हें बचा लिया| अब कल्पना जिन्दगी में कुछ करना चाहती थी क्योकि उन्हें लगा की नई जिन्दगी कुछ करने के लिए मिली है|

मुंबई का सफ़र- ससुराल छोड़कर 16 साल की उम्र में वो मुंबई आ गई और चाचा के पास रहने लगी जहाँ उन्हें धागा काटने का काम दिया गया जिसमे उन्हें दो रुपये मिलते थे लेकिन बाद में उन्होंने मशीन चलाना शुरू कर दिया जिससे उन्हें तीन सौ रुपये मिलने लगे| इसके बाद उनका परिवार भी मुंबई आ गया लेकिन बीमारी के चलते उनके बहन की मौत हो गई जिससे वो पूरी तरह से टूट गई लेकिन हार नहीं मानी|

खुद का बिजनस– कल्पना इतने से संतुष्ट नहीं होने वाली थी जिन्दगी चलती रहे| 22 साल की उम्र वो 16 घंटे काम करती थी और धीरे धीरे उनका प्रभाव ऐसा जमा की उन्होंने एक संगठन बना लिया और लोन लेकर फर्नीचर का बिजनस शुरू किया| साल 1989 में कल्पना ने दूसरा विवाह किया लेकिन कुछ समय बाद ही पति की मृत्यु हो गई|

टर्निंग पॉइंट– कल्पना ने जब बिजनस शुरू किया था तो एक जमीन खरीदी थी जो विवादित थी लेकिन उसके क्लियर हो जाने के बाद उन्हें पचास लाख रुपये मिल गए जिससे उनका जीवन कुछ बेहतर होने लगा| इसके बाद कल्पना कुछ बेहतर करने की कोशिश में थे और उनके हाथ लगी कमानी ट्यूब|

कमानी ट्यूब– एक ऐसी कंपनी थी जिसके ऊपर 116 करोड़ रुपये का कर्ज था लेकिन कल्पना ने सस्ते दामो में इसे खरीदा और धीरे धीरे इसे प्रॉफिट में लाकर खड़ा कर दिया| उस समय के वित्त मंत्री ने कल्पना का बहुत सहयोग किया|
इसके बाद साल 2003 में कल्पना को पद्मश्री से नवाजा गया| आज कल्पना उन लाखो औरतो के लिए मिसाल बन गई है जो की ससुराल और पति के पीछे अपना पूरा जीवन बर्बाद कर देती है और उन्हें सहती रहती है| आज कमानी ट्यूब हजार करोड़ की कम्पनी बन गई है|

interesting hindi news - thelatesthindinews.com - अमेरिका-जाने-का-मौका-छोड़क/

अमेरिका जाने का मौका छोड़कर शुरू की शू पोलिश की कंपनी, आज करोड़ का है टर्नओवर

अमेरिका जाने का मौका छोड़कर शुरू की शू पोलिश की कंपनी, आज करोड़ का है टर्नओवर
अक्सर माँ बाप अपने बच्चे को कहते नजर आते है की अगर सही से पढाई नहीं करोगे तो जिंदगीभर जूता पोलिश करना और तुमको वो भी कोई नौकरी नहीं देगा| लेकिन जो माँ बाप संदीप गजकस के बारे माँ जानते है वो ऐसा नहीं कहेगे क्योकि इस लड़के ने जूता पोलिश करते करते ऐसी कंपनी बनाई जिसका सालाना टर्नओवर पांच करोड़ का है| ये कहानी है मुंबई के संदीप गजकस की|

शुरुआत– संदीप का जन्म मुंबई में हुआ और उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और बाद में इंजीनियरिंग की और फिर अमेरिका जाने का मौका हाथ लगा| माँ बाप बहुत खुश हुए की अमेरिका चले जाने से घर की स्थिति बेहतर हो जाएगी और हर अतराफ़ नाम होगा लेकिन संदीप ने अमेरिका जाने का फैसला टाल दिया| दरअसल उसी कई जगह हमले हो रहे थे जिसके चलते उन्होंने या प्लान कैंसिल कर दिया| अब संदीप के मन में नौकरी करना था ही नहीं वो खुद का धंधा करना चाहते थे तो उन्हें आईडिया आया ऐसा जिसके बारे में कोई नहीं सोच पाया|

दा शू लौंड्री कंपनी– साल 2003 में संदीप को विचार आया की कितने सlरे ऐसे जूते होते है जो सही से पोलिश नहीं होते है और ना ही इनकी सही कीमत लगाई जाती है| बस इसी विचार ने एक कंपनी खडी कर दी| संदीप ने इसी साल एक कंपनी शुरू की और पैसा लिया घरवालो से जो उन्होंने मेहनत से बचा के रखा था| १२ हजार रुपये से इस कंपनी की शुरुआत की और कहते है की ये कंपनी बाथरूम में हुआ करती थी| संदीप ने बड़े बड़े ब्रांड्स से सम्पर्क किया और उनकी शू पोलिशिंग का काम लिया| नाइके, बाटा, एडीडास जैसी बड़ी बड़ी कम्पनियों के आर्डर उन्हें मिलने लगे| देखते देखते संदीप का बिजनस तरक्की करने लगा और आज उनकी कंपनी की सालाना कमाई लगभग पांच करोड़ रुपये है| आज वो बड़े बड़े उद्यमियों में गिने जाते है|

क्या कहते है संदीप– संदीप का कहना है की मैं हमेशा कुछ अलग करने के बारे में सोचता था| जब मैंने ये बात अपने रिश्तेदारों को बताई तो वो हसने लगे और बोले की ये कोई काम नहीं होता है और जब तुम्हे यही करना था तो तुमने पढाई क्यों की और शुरू से ही ये काम क्यों शुरू नहीं किया| मेरे घरवाले भी कई दिनों तक मेरे खिलाफ रहे लेकिन बाद में साथ आ गए| संदीप की कहानी इतनी रोचक है की उसे सुनने के बाद हर कोई उनका फैन बन जाता है| आज बड़े बड़े चैनल्स उनका इंटरव्यू करने आते है और उनसे मिलने लोग आते है| मुंबई के अँधेरी इलाके से शुरू हुई “दा शू लौंड्री कपंनी” आज भारत के अलग अलग शहरो में है| संदीप ने इस कंपनी की फ्रेंचाइजी बाटनी भी शुरू कर दी है| दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और गोरखपुर जैसे बड़े बड़े शहरो में इस कम्पनी के आउटलेट है| संदीप की कहानी हमे बताती है की कैसे अपने सपनो को जिया जाए| कैसे घरवालो और रिश्तेदारों को गलत साबित करना चहिये और कैसे अपने दमपर वो काम करना चहिये जो आप सच में करना चाहते है|

india news today in hindi - thelatesthindinews.com (दिवाली-शौपिंग-में-ध्यान-र)

दिवाली शौपिंग में ध्यान रखे ये बाते, बचेंगे खूब पैसे

दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसमे हमारे घर में हर तरफ ख़ुशी का माहौल होता है| एक महीने पहले से इसकी तैयारियां शुरू हो जाती है और कई सारी नई चीजे हम अपने घर में लाते है| कई बार देखा जाता है की जब हम दिवाली के बाद हिसाब लगाते है तो हमे लगता है की हमारा बहुत पैसा खर्च हो गया| इस अधिक खर्च से बचने के लिए आप दिवाली के समय जब सामान खरीदे तो ऐसी बाते ध्यान रखे-

  • लिस्ट बनाये
सबसे पहले आप उन सामानों की लिस्ट बनाये की आपको क्या क्या चीजे लेनी है और उन्हें लिखे| लिखने के बाद उन्हें देखे की ये सामान कितने के पड़ रहे है और इन सबको खरीदने में कितना अधिक पैसा खर्च होने वाला है| आप जब ऐसी लिस्ट बना लेगे तो आपके सामने आपकी जरूरते एक साथ आ जाएगी|

  • जरूरत समझे
लिस्ट बनाने के बाद आप देखे की कौन सा सामान जरूरी है कौन सा नहीं| कई बार हम बहुत कुछ ऐसा ले आते है जो की हमे लेना नहीं होता है| इसीलिए आप लिस्ट बनाये और देखे की कौन सा सामान आपको सच में चहिये और जो सामान जरूरी हो उसे सबसे पहले अंडरलाइन करे और फिर बाकी सामानों को लिस्ट से काट दे| ऐसे में कही ना कही आपके पैसे बचेगे|

  • ऑफर्स में ना पड़े
दिवाली में हमारा अधिक खर्चा या यूं कहे की जरूरत से ज्यादा खर्चा हो जाता है क्योकि हम ऑफर्स के चक्कर में कुछ भी खरीदने लगते है| आप ऑफर्स के चक्कर में न पड़े और छूट देखकर अपना पैसा बर्बाद ना करे| ये आते जाते रहते है और इनसे आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चहिये| इस तरीके से आप बहुत अधिक पैसा बचा सकते है|

  • ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों देखे
अगर आप कोई ऐसी चीजे देख रहे है जो बहुत अधिक महगी है तो आप उसे ऑनलाइन और ऑफलाइन कम्पेयर करे और इसके बाद खरीदे| कई बार ऐसा होता है की कुछ चीजे ऑनलाइन सस्ती होती है तो कुछ चीजे ऑफलाइन सस्ती होती है तो ऐसे में आप दोनों जगह देख ले और इसके बाद जहाँ सस्ती हो वहां से ले जिससे आप खूब पैसे बचा सकते है|

  • फालतू के गिफ्ट्स
दिवाली में जिसे चाहे फालतू के गिफ्ट्स देते रहते है और इन्ही का वजट बहुत अधिक हो जाता है और ऐसे में हमारा पूरा आगे का महीना गड़बड़ होने लगता है| आप फालतू के गिफ्ट्स देने से बचे और इन्हें खरीदे ही नहीं| ऐसे में आपके पैसे बचेगे|

  • पटाखे
ये ऐसा सामान है जो हम चाहे कितने का भी खरीद ले संतोष नहीं होता है और ऐसे में हमारे पैसे बर्बाद हो जाते है| आप पटाखे खरीदते है और वो आप जला नहीं पाते है और फिर वो पड़े पड़े बेकार होने लगते है| आप जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में पटाखे लाये और फिर उन्हें जलाये| अगर आप ऐसा करेगे तो आपके खूब सारे पासे बच जायेगे क्योकि इसमें हम खूब पैसा उड़ा देते है जो की हम बचा सकते है|

Latest news update in Hindi - thelatesthindinews.com (क्या-आप-जानते-है-भारत-की-वो)

क्या आप जानते है भारत की वो जगह जहाँ सबसे पहले पड़ती है सूर्य की किरणें


सूर्योदय हम सबको बहुत पसंद होता है| सूरज की सुबह की पहली किरण जब अपनी लालिमा लेकर धरती पर आती है तो हम सबके मन में ख़ुशी की लहर आती है| यह सकारात्मकता का भाव अपने साथ लेकर आती है| लेकिन आपने कैसे मान लिया की सूरज की पहली किरण आपके शहर में आई है| दुनिया में सूरज की सबसे पहली किरण कहाँ पड़ती है शायद आप नहीं जानते होगे तो हम बता देते है की वो जगह हमारे भारत में ही है|

ये है वो जगह- जहाँ सूर्य से आने वाली सबसे पहली किरण पड़ती है यानी की सूर्य की किरण धरती में जहाँ सबसे पहले पड़ती है वो जगह हमारे भारत में स्थित है और ये अरुणांचल में है| इसका नाम ही अरुण और अंचल यानी की सूर्य का आँचल जहाँ सबसे पहले सूर्य अपनी किरणें भेजता है| अरुणाचल प्रदेश की डोंग वैली नामक जगह में है देवांग घाटी जहाँ सूरज की रौशनी सबसे पहले पड़ती है| इस रौशनी को देखने के लिए हजारो की संख्या में लोग यहाँ आते है| देश ही नहीं बल्कि विदेशो से भी लोग इसे देखने के लिए आते है और जनवरी के मौसम में यहाँ बहुत अधिक भीड़ होती है| यह जगह समुदंर तल से लगभग 2655 मीटर की उचाई में है और यह लोहित जिले की मैकमोहन लाइन के बहुत करीब है|

देश में दोपहर तो यहाँ रात- एक बात और है की जैसे सूरज की सबसे पहली किरण यहाँ पड़ती है उसी तरह देश में सबसे पहले अँधेरा भी यही होता है| जब हमारे और आपके यहाँ शाम के चार बज रहे होते है तो यहाँ रात हो जाती है| अरुणाचल एक ऐसी जगह है जहाँ सबसे पहले सूर्य की किरणें पड़ती है और सबसे पहले रात होती है| मान लीजिए की आपके यहाँ 12 बजे है तो वहां 4 बजे के जैसे धूप होती है और जब आपके यहाँ शाम के चार बजते है तो वहां रात हो जाती है| यहाँ पर सूरज सुबह के चार बजे उग जाता है और शाम के चार बजे अस्त भी हो जाता है| यहाँ पर वायुमंडल में दवाब की वजह से ऐसा होता है|

सबसे सुंदर जगह- जब सुबह यहाँ सूर्योदय होता है उस समय आप इसे दुनिया की सबसे सुंदर जगह कह सकते है| एक जगह जहाँ सबसे पहले सूर्य की किरणें आई हो और बाकी दुनिया में अँधेरा छाया हो| साल में कम से कम लाखो की संख्या में पर्यटक यहाँ आते है और इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश करते है| अधिक भीड़ होने की वजह से यहाँ पुलिस की सुरक्षा भी बहुत अधिक रहती है| आपको इस जगह एक बार जरूर जाना चहिये| एक ऐसी जगह को देखने के लिए जब दूसरे देशो से लोग आ सकते है तो हम अपने देश में रहते हुए इस सुंदर और मनमोहक जगह को देखने तो एक बार जरूर जा सकते है| सूरज की रौशनी के हिसाब से अब यहाँ का जनजीवन भी हो गया है और लोग अपना काम इसी समय के अनुसार करने लग गए है|

The latest hindi news - thelatesthindinews.com (ये-है-वो-प्रेम-गली-जहां-kiss-करन)

ये है वो प्रेम गली जहां KISS करने के लिए कपल्स की लगती लम्बी लाइन


आपका लाइफ पार्टनर आपसे आपका सिर्फ समय चाहता हैं, जो आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में देना बहुत मुश्किल सा हो गया है. हर कोई चाहता है कि वो हमेशा ही अपने साथी के साथ रहे, उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताए. लेकिन ऐसा हर किसी के साथ नहीं हो पाता. हमने अक्सर देखा है कि कपल हमेशा अपने प्यार को जताने का मौका ढूंढ़ते रहते हैं. लेकिन दुनिया और समाज का डर उन्हें इस काम को करने की इजाज़त नहीं देता.
‘किस’ प्यार को एक्सप्रेस करने का सबसे अच्छा तरीका है. जो टाइम आप अपने लवर को नहीं दें पा रहे हैं, तो मिलने पर सिर्फ एक किस से पिछली सारी अधूरी मुलाकात पूरी हो सकती हैं.
अब बात ये आती हैं कि कहां? पब्लिक प्लेस पर ऐसा नहीं चलता बल्कि हमें आस पास के सभी लोगों का ध्यान देना होता है जिसके कारण हम अपने साथी के साथ कुछ खास पल नहीं बिता सकते. लेकिन आज हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आप भी जाना चाहेंगे और वहीं बसना चाहेंगे.

ये है वो जगह:
मैक्सिको में एक ऐसी जगह है जहां आप अपने पार्टनर के साथ खुल के अपने प्यार का इज़हार कर सकते. यानी एक ऐसा पब्लिक प्लेस जहां आप अपने पार्टनर को सरेआम किस कर सकते. आपको बता दूं इस जगह पर कपल किस करने के लिए लाइन में लगे होते हैं. जी हां, सेंट्रल मेक्सिको के गुआनाजुआतो में एक ऐसी ही जगह है जहां कपल एक दूसरे को किस करने के लिए घंटों में लाइन में खड़े रहते हैं. कहा जाता है कि यहां आकर जो भी किस करता है वो आगे आने वाले 15 साल तक खुश रहता है.
फरवरी महीना है बेस्ट:
फरवरी को प्यार का महीना भी कहा जाता है, क्योंकि इस महीने वैलेंटाइन डे भी आता है. इस महीने न तो ज्यादा गर्मी होती न ही ज्यादा सर्दी तो प्यार करने के लिए ये महीना बेस्ट माना जाता है. इसी के चलते फरवरी में भरी संख्या में लोग आते हैं और किस करने के लिए लम्बी लाइन में लगते हैं. आपको  बता दें, यह जगह एक बेहद पतली गली है जिसका नाम एल कैलेजन डेल बेसो है यानि ‘किस की गली’.
अनोखी कहानी है इस गली की:
कहा जाता है यहां दो लवर्स बालकनी में बैठकर किस किया करते थे. लड़की डोना कार्मेन धनी परिवार से थी, जबकि लड़का लुइस गरीब फैमिली से. डोना के पिता ने उसे प्यार करने की इजाजत नहीं दी, इसलिए लुइस ने उसके घर की खिड़की और बालकनी के सामने एक कमरा किराए पर ले लिया. लवर्स देर रात इस गली में किस किया करते थे. लेकिन जब पिता को पता चला, उसने गुस्से में अपनी बेटी का कत्ल कर दिया. कुछ लोग कहते हैं कि लुइस उसे बचाने के लिए बालकनी से कूद पड़ा, लेकिन नीचे गिर पड़ा और उसकी गर्दन टूट गई.

लोग देते प्यार का संदेश:
जिस कमरे में डोना रहा करती थी, वहां अब एक गिफ्ट की दुकान है. कपल उस बालकनी में आकर अपना नाम लिखते हैं और संदेश भी छोड़ आते हैं. मान्यता के अनुसार उस खिड़की पर लोग ताले भी लगाते हैं.

Wednesday, 17 October 2018

india news today in hindi




Hindi is the native language of each Indian and furthermore the coupling dialect of India. In spite of the nearness of different provincial dialects Hindi is the main dialect which is talked all over India whether it southern India or northern India. Dominant part of the Indian populace is profoundly agreeable in talking and notwithstanding perusing Hindi dialect. That is the reason Indian Hindi daily papers are extremely well known. Indian Hindi daily papers got another rent of life when different English dailies propelled their Hindi renditions. This dispatch saw the development of different Indian Hindi daily papers which took the Indian populace with a walk. Among all these Indian Hindi daily papers Deink Bashkir takes the show. Deink Bashkir is one of the India's most prominent and broadly perused Hindi daily papers. As indicated by couple of specialists it's the Deink Bashkir just that resuscitated Indian Hindi daily paper and gave it another look.
These days Indian Hindi daily papers are giving extreme rivalry to even English daily papers as larger part Indian populace currently like to peruse Hindi daily paper. Seeing this developed prevalence numerous Indian promoting offices began giving careful consideration to Indian Hindi daily papers and this prompted the expansion in income age. Indian Hindi daily papers too have transformed themselves as now as opposed to giving basic and just news they presently focus more on infotainment. An economy that is developing at 8.5% and a splendid viewpoint for the future...that's the India story getting it done. Yet, the unmentioned example of overcoming adversity,
Which in a way finishes the photo, is the free press that our multi year old popular government has figured out how to support? Returning to 1870 when India's first daily paper - The Bengal Gazette - to the present plenty of daily papers and news channels; the media business has made considerable progress. In any case, a smidgen of investigation on the development of media in India, who for the most part serve India news uncovers that the genuine development and the lofty development bend really happened just later with the coming of the vernacular press. This move from the significant dialects, Hindi and English, towards local dialects seemed well and good thinking about the assorted variety in the nation.
 Here in India tongues change each couple of hundred kilometers and dialects change from state to state. To viably influence individuals to comprehend what everything that is imperative to them, news in single word, it was essential that they be tended to in their dialect. That is the reason, the vernacular press has done exceedingly well in India. A similar thought was conveyed forward first by the radio and after that by the visual media. Regardless of how essential the national level news diverts in Hindi and English might be, individuals crosswise over India do keep a tab on the news channels that offers them
news in their own dialect. The normal man just wants to comprehend news in the dialect he is most agreeable in.

News programs have all of a sudden turned out to be hot property and are competing for consideration with other prevalent projects broadcast in various channels. All real TV supporters are including no less than one news channel to their bundle. The greatest cerebral pain for propelling a satellite station is program programming for round the clock. In this crossroads, newsgathering is a noteworthy undertaking for the 24-hour news channels. To provide food this errand, the rising electronic channels have constantly made an endeavor to cover every one of the episodes independent of position, area and time. These stations not just altered the idea of news on Indian TV yet additionally changed the news designs. Prior to 1990s, Doordarshan had hoarded report on Indian TV and furthermore transformed the news programs into a frump work out. Presently the private channels made the news a basic item like nourishment, fabric and sanctuary. The solid purpose of all the present news notices is their topicality, objectivity, polished altering and great visuals. News has voyage far from the DD time. From Local occasions to International occasions, breaking news to news examination, TV cleanser to page3 news, each event goes under domain of news. In this article, we have shrouded some noteworthy changes in news broadcasting in India when the Gulf War.
TV in India is experiencing critical changes in the current changed condition. To comprehend these progressions, one needs some short thought of the street secured by the TV slots up until this point. The adventure began as a test premise with money related allow from UNESCO in fifteenth September 1959. The temporary studio at Akashvani Bhavan in New Delhi was decided for area of the examination. The examination began with one-hour program, communicate two times per week, on network wellbeing, subject rights, instruction and activity sense and so forth. To the extent news is concerned, it was propelled precisely six years after the commencement of TV broadcasting. Day by day one-hour program with a news notice was served to the Indian watchers. In any case, one noteworthy downside of TV was that you couldn't appreciate the first shade of the articles in light of highly contrasting transmission.
 First multicolor program was the Prime Minister's deliver to the country from Red Fort in Delhi on India's 35th Independence Day. Around the same time, DD National channel was propelled. The point of propelling the National channel is supporting national incorporation, and instilling a feeling of pride in Indians. Indian watchers additionally delighted in the hued variant of the Asian Games facilitated by New Delhi in their illustration room. The inclusion of significant occasions and diverse events loan a major hand behind the invasion of TV signs to the alcove and corners of the subcontinent. Indian Government had found a way to extend the TV broadcasting demographically and geologically. In 1983 TV signals were accessible to only 28% of the populace, this had multiplied before the finish of 1985 and by 1990 more than 90% of the populace approached TV signals. In 1984, DD Metro channel was added to give a restrictive excitement to the urban watchers. First and foremost, this channel was limited to metropolitan urban communities.

interesting hindi news

the latest hindi news https://thelatesthindinews.com/author/admin/ अनोखा शहर जहाँ सर्दियों में 40 दिन सूरज नहीं निकलता , गर...